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सहीह मुस्लिम

नंबर 945

नंबर 945किताब 4, नंबर 107अरबी नंबरिंग 419.02
وَحَدَّثَنِيهِ عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ آخِرُ نَظْرَةٍ نَظَرْتُهَا إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَشَفَ السِّتَارَةَ يَوْمَ الاِثْنَيْنِ بِهَذِهِ الْقِصَّةِ وَحَدِيثُ صَالِحٍ أَتَمُّ وَأَشْبَعُ ‏.‏
Anas reported:The last glance that I have had of the Messenger of Allah (ﷺ) (before his death) was that when he on Monday drew the curtain aside. The hadith transmitted by Salih is perfect and complete

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।