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सहीह मुस्लिम

नंबर 929

नंबर 929किताब 4, नंबर 91अरबी नंबरिंग 413.02
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا حُمَيْدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الرُّؤَاسِيُّ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ صَلَّى بِنَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم وَأَبُو بَكْرٍ خَلْفَهُ فَإِذَا كَبَّرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَبَّرَ أَبُو بَكْرٍ لِيُسْمِعَنَا ‏.‏ ثُمَّ ذَكَرَ نَحْوَ حَدِيثِ اللَّيْثِ ‏.‏
Jabir said:The Messenger of Allah (ﷺ) led the prayer and Abu Bakr was behind him. When the Messenger of Allah (ﷺ) recited the takbir, Abu Bakr also recited (it) in order to make it audible to us. And the rest of the hadith is like one transmitted by Laith

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।