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सहीह मुस्लिम

नंबर 917

नंबर 917किताब 4, नंबर 79अरबी नंबरिंग 410.03
حَدَّثَنِي حَرْمَلَةُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنِي ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي عَمْرٌو، أَنَّ أَبَا يُونُسَ، حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا قَالَ أَحَدُكُمْ فِي الصَّلاَةِ آمِينَ ‏.‏ وَالْمَلاَئِكَةُ فِي السَّمَاءِ آمِينَ ‏.‏ فَوَافَقَ إِحْدَاهُمَا الأُخْرَى غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: When anyone amongst you utters Amin in prayer and the angels in the sky also utter Amin, and this (utterance of the one) synchronises with (that of) the other, all his previous sins are pardoned

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।