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सहीह मुस्लिम

नंबर 910

नंबर 910किताब 4, नंबर 72अरबी नंबरिंग 406.03
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَكَّارٍ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ زَكَرِيَّاءَ، عَنِ الأَعْمَشِ، وَعَنْ مِسْعَرٍ، وَعَنْ مَالِكِ بْنِ مِغْوَلٍ، كُلُّهُمْ عَنِ الْحَكَمِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ مِثْلَهُ غَيْرَ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ وَبَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَقُلِ اللَّهُمَّ ‏.‏
A hadith like this has been narrated by al-Hakam except that he said:" Bless Muhammad (ﷺ)" and he did not say:" O Allah I

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।