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सहीह मुस्लिम

नंबर 902

नंबर 902किताब 4, नंबर 64अरबी नंबरिंग 403.01
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا لَيْثٌ، ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحِ بْنِ الْمُهَاجِرِ، أَخْبَرَنَا اللَّيْثُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، وَعَنْ طَاوُسٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّهُ قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُعَلِّمُنَا التَّشَهُّدَ كَمَا يُعَلِّمُنَا السُّورَةَ مِنَ الْقُرْآنِ فَكَانَ يَقُولُ ‏ "‏ التَّحِيَّاتُ الْمُبَارَكَاتُ الصَّلَوَاتُ الطَّيِّبَاتُ لِلَّهِ السَّلاَمُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ السَّلاَمُ عَلَيْنَا وَعَلَى عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ أَشْهَدُ أَنْ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا رَسُولُ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ ابْنِ رُمْحٍ كَمَا يُعَلِّمُنَا الْقُرْآنَ ‏.‏
इब्ने अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- हमें तशह्हुद सिखाते थे, जिस प्रकार हमें क़ुरआन की सूरा सिखाते थे। आप कहा करते थेः मुबारक बंदगियां तथा पाक सलातें केवल अल्लाह ही के लिए हैं, ऐ नबी आप पर सलामती और अल्लाह की रहमत एवं उसकी बरकत उतरे, हमारे ऊपर तथा अल्लाह के नेक बंदों पर सलामती हो, मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पुज्य नहीं और मुहम्मद- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अल्लाह के रसूल हैं। इब्ने रुम्ह की रिवायत मैं (इस प्रकार) हैः जैसे हमें क़ुरआन सिखाते थे।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।