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सहीह मुस्लिम

नंबर 899

नंबर 899किताब 4, नंबर 61अरबी नंबरिंग 402.03
حَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْجُعْفِيُّ، عَنْ زَائِدَةَ، عَنْ مَنْصُورٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ مِثْلَ حَدِيثِهِمَا وَذَكَرَ فِي الْحَدِيثِ ‏ "‏ ثُمَّ لْيَتَخَيَّرْ بَعْدُ مِنَ الْمَسْأَلَةِ مَا شَاءَ أَوْ مَا أَحَبَّ ‏"‏ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Mansur with the same chain of transmitters and he made a mention of this:" Then he may choose any supplication which pleases him or which he likes

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।