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सहीह मुस्लिम

नंबर 880

नंबर 880किताब 4, नंबर 43अरबी नंबरिंग 395.03
حَدَّثَنِي أَحْمَدُ بْنُ جَعْفَرٍ الْمَعْقِرِيُّ، حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُوَيْسٍ، أَخْبَرَنِي الْعَلاَءُ، قَالَ سَمِعْتُ مِنْ أَبِي وَمِنْ أَبِي السَّائِبِ، وَكَانَا، جَلِيسَىْ أَبِي هُرَيْرَةَ قَالاَ قَالَ أَبُو هُرَيْرَةَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ صَلَّى صَلاَةً لَمْ يَقْرَأْ فِيهَا بِفَاتِحَةِ الْكِتَابِ فَهْىَ خِدَاجٌ ‏"‏ ‏.‏ يَقُولُهَا ثَلاَثًا بِمِثْلِ حَدِيثِهِمْ ‏.‏
Abu Huraira reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said: He who said his prayer, but did not recite the opening chapter of al-Kitab, his prayer is incomplete. He repeated it thrice

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।