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सहीह मुस्लिम

नंबर 863

नंबर 863किताब 4, नंबर 26अरबी नंबरिंग 390.03
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا حُجَيْنٌ، - وَهُوَ ابْنُ الْمُثَنَّى - حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ عُقَيْلٍ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ قُهْزَاذَ، حَدَّثَنَا سَلَمَةُ بْنُ سُلَيْمَانَ، أَخْبَرَنَا يُونُسُ، كِلاَهُمَا عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ كَمَا قَالَ ابْنُ جُرَيْجٍ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا قَامَ لِلصَّلاَةِ رَفَعَ يَدَيْهِ حَتَّى تَكُونَا حَذْوَ مَنْكِبَيْهِ ثُمَّ كَبَّرَ ‏.‏
This hadith has been transmitted with the same chain of transmitters by al. Zuhri as narrated by Ibn Juraij (who) said. When the Messenger of Allah (ﷺ) stood up for prayer, he raised hands (to the height) apposite the shoulders and then recited takbir

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।