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सहीह मुस्लिम

नंबर 1155

नंबर 1155किताब 4, नंबर 317अरबी नंबरिंग 517.04
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، وَعِيسَى بْنُ حَمَّادٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلِ بْنِ حُنَيْفٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ، قَالَ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ مُلْتَحِفًا مُخَالِفًا بَيْنَ طَرَفَيْهِ ‏.‏ زَادَ عِيسَى بْنُ حَمَّادٍ فِي رِوَايَتِهِ قَالَ عَلَى مَنْكِبَيْهِ ‏.‏
Umar b. Abu Salama reported:I saw the Messenger of Allah (ﷺ) praying in a single garment with its ends crossing each other. 'Isa b. Hammad added:" placing on his shoulders

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।