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सहीह मुस्लिम

नंबर 1150

नंबर 1150किताब 4, नंबर 312अरबी नंबरिंग 515.03
حَدَّثَنِي عَمْرٌو النَّاقِدُ، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، قَالَ عَمْرٌو حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ سِيرِينَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ نَادَى رَجُلٌ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ أَيُصَلِّي أَحَدُنَا فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ فَقَالَ ‏ "‏ أَوَكُلُّكُمْ يَجِدُ ثَوْبَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
Abu Huraira reported:A person addressed the Messenger of Allah (ﷺ) and said to him: Can any one of us say prayer in one garment? He said: Do all of you possess two garments?

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।