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सहीह मुस्लिम

नंबर 1138

नंबर 1138किताब 4, नंबर 300अरबी नंबरिंग 510.02
حَدَّثَنَا شَيْبَانُ بْنُ فَرُّوخَ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ الْمُغِيرَةِ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي ح، قَالَ وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، أَيْضًا أَخْبَرَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ سَمِعْتُ سَلْمَ بْنَ أَبِي الذَّيَّالِ، ح قَالَ وَحَدَّثَنِي يُوسُفُ بْنُ حَمَّادٍ الْمَعْنِيُّ، حَدَّثَنَا زِيَادٌ الْبَكَّائِيُّ، عَنْ عَاصِمٍ الأَحْوَلِ، كُلُّ هَؤُلاَءِ عَنْ حُمَيْدِ بْنِ هِلاَلٍ، بِإِسْنَادِ يُونُسَ كَنَحْوِ حَدِيثِهِ ‏.‏
This hadith has been transmitted by Humaid b. Hilal on the authority of Yunus

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।