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सहीह मुस्लिम

नंबर 1135

नंबर 1135किताब 4, नंबर 297अरबी नंबरिंग 509.01
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، - وَاللَّفْظُ لاِبْنِ الْمُثَنَّى - قَالَ إِسْحَاقُ أَخْبَرَنَا وَقَالَ ابْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ مَسْعَدَةَ، - عَنْ يَزِيدَ، - يَعْنِي ابْنَ أَبِي عُبَيْدٍ - عَنْ سَلَمَةَ، - وَهُوَ ابْنُ الأَكْوَعِ أَنَّهُ كَانَ يَتَحَرَّى مَوْضِعَ مَكَانِ الْمُصْحَفِ يُسَبِّحُ فِيهِ ‏.‏ وَذَكَرَ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَتَحَرَّى ذَلِكَ الْمَكَانَ وَكَانَ بَيْنَ الْمِنْبَرِ وَالْقِبْلَةِ قَدْرُ مَمَرِّ الشَّاةِ ‏.‏
Salama b. Akwa' reported:He sought the place (in the mosque) where the copies of the Qur'an were kept and glorified Allah there, and the narrator made a mention that the Messenger of Allah (ﷺ) sought that place and that was between the pulpit and the qibla-a place where a goat could pass

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।