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सहीह मुस्लिम

नंबर 1116

नंबर 1116किताब 4, नंबर 278अरबी नंबरिंग 501.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَرْكُزُ - وَقَالَ أَبُو بَكْرٍ يَغْرِزُ - الْعَنَزَةَ وَيُصَلِّي إِلَيْهَا ‏.‏ زَادَ ابْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ وَهْىَ الْحَرْبَةُ ‏.‏
Ibn Umar reported:The Apostle of Allah (ﷺ) set up (sutra), and Abu Bakr said: He implanted iron-tipped spear and said prayer towards its direction. Ibn Abu Shaiba made this addition to it:" Ubaidullah said that it was a spear

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।