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सहीह मुस्लिम

नंबर 1087

नंबर 1087किताब 4, नंबर 249अरबी नंबरिंग 484.03
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ رَافِعٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ آدَمَ، حَدَّثَنَا مُفَضَّلٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ مُسْلِمِ بْنِ صُبَيْحٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ مَا رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم مُنْذُ نَزَلَ عَلَيْهِ ‏{‏ إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ‏}‏ يُصَلِّي صَلاَةً إِلاَّ دَعَا أَوْ قَالَ فِيهَا ‏"‏ سُبْحَانَكَ رَبِّي وَبِحَمْدِكَ اللَّهُمَّ اغْفِرْ لِي ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported:Never did I, see the Messenger of Allah (ﷺ) after the revelation (of these verses):" When Allah's help and victory came." observin- his prayer without making (this supplication) or he said in it (supplication): Hallowed be Thee, my Lord, and with Thy praise, O Allah, forgive me

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।