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सहीह मुस्लिम

नंबर 1063

नंबर 1063किताब 4, नंबर 225अरबी नंबरिंग 474.02
وَحَدَّثَنِي أَبُو بَكْرِ بْنُ خَلاَّدٍ الْبَاهِلِيُّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، - يَعْنِي ابْنَ سَعِيدٍ - حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنِي أَبُو إِسْحَاقَ، حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ، حَدَّثَنِي الْبَرَاءُ، - وَهُوَ غَيْرُ كَذُوبٍ - قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم إِذَا قَالَ ‏ "‏ سَمِعَ اللَّهُ لِمَنْ حَمِدَهُ ‏"‏ ‏.‏ لَمْ يَحْنِ أَحَدٌ مِنَّا ظَهْرَهُ حَتَّى يَقَعَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَاجِدًا ثُمَّ نَقَعُ سُجُودًا بَعْدَهُ ‏.‏
Al-Bara' reported, and he was no liar:When the Messenger of Allah (ﷺ) said: Allah listened to him who praised Him, none of us bent his back till he (the Holy Prophet) prostrated; we then, afterwards, went down in prostration

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।