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सहीह मुस्लिम

नंबर 1056

नंबर 1056किताब 4, नंबर 218अरबी नंबरिंग 470.02
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مِنْهَالٍ الضَّرِيرُ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي عَرُوبَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنِّي لأَدْخُلُ الصَّلاَةَ أُرِيدُ إِطَالَتَهَا فَأَسْمَعُ بُكَاءَ الصَّبِيِّ فَأُخَفِّفُ مِنْ شِدَّةِ وَجْدِ أُمِّهِ بِهِ ‏"‏ ‏.‏
Anas b. Malik reported the Messenger of Allah (ﷺ) having said:When I begin the prayer I Intend to make it long, but I hear a boy cry. ing; I then shorten it because of his mother's feelings

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।