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सहीह मुस्लिम

नंबर 1051

नंबर 1051किताब 4, नंबर 213अरबी नंबरिंग 468.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مُرَّةَ، قَالَ سَمِعْتُ سَعِيدَ بْنَ الْمُسَيَّبِ، قَالَ حَدَّثَ عُثْمَانُ بْنُ أَبِي الْعَاصِ، قَالَ آخِرُ مَا عَهِدَ إِلَىَّ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا أَمَمْتَ قَوْمًا فَأَخِفَّ بِهِمُ الصَّلاَةَ ‏"‏ ‏.‏
Uthman b. Abu'l-'As reported:The last thing which the Messenger of Allah (ﷺ) instructed me was: When you lead the people in prayer, be brief

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।