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सहीह मुस्लिम

नंबर 1039

नंबर 1039किताब 4, नंबर 201अरबी नंबरिंग 464.03
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا مِسْعَرٌ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ، قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ بْنَ عَازِبٍ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَرَأَ فِي الْعِشَاءِ بِالتِّينِ وَالزَّيْتُونِ ‏.‏ فَمَا سَمِعْتُ أَحَدًا أَحْسَنَ صَوْتًا مِنْهُ ‏.‏
Al-Bara' b. 'Azib reported:I heard the Messenger of Allah (ﷺ) reciting in the night prayer:" By the Fig and the Olive," and I have never heard anyone with a sweeter voice than he

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।