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सहीह मुस्लिम

नंबर 1037

नंबर 1037किताब 4, नंबर 199अरबी नंबरिंग 464.01
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ الْعَنْبَرِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَدِيٍّ، قَالَ سَمِعْتُ الْبَرَاءَ، يُحَدِّثُ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ كَانَ فِي سَفَرٍ فَصَلَّى الْعِشَاءَ الآخِرَةَ فَقَرَأَ فِي إِحْدَى الرَّكْعَتَيْنِ ‏{‏ وَالتِّينِ وَالزَّيْتُونِ‏}‏
Adi reported:I heard al-Bara' narrating it from the Messenger of Allah (ﷺ) that while in a journey he said the night prayer and recited in one of the two rak'ahs:" By the Fig and the Olive" (Su'rah xcv)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।