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सहीह मुस्लिम

नंबर 1032

नंबर 1032किताब 4, नंबर 194अरबी नंबरिंग 461.02
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ أَبِي الْمِنْهَالِ، عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الأَسْلَمِيِّ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقْرَأُ فِي الْفَجْرِ مَا بَيْنَ السِّتِّينَ إِلَى الْمِائَةِ آيَةً ‏.‏
Abu Barza Aslami reported:The Messenger of Allah (ﷺ) used to recite from sixty to one hundred verses in the morning prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।