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सहीह मुस्लिम

नंबर 1020

नंबर 1020किताब 4, नंबर 182अरबी नंबरिंग 454.01
حَدَّثَنَا دَاوُدُ بْنُ رُشَيْدٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، - يَعْنِي ابْنَ مُسْلِمٍ - عَنْ سَعِيدٍ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ الْعَزِيزِ - عَنْ عَطِيَّةَ بْنِ قَيْسٍ، عَنْ قَزْعَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ لَقَدْ كَانَتْ صَلاَةُ الظُّهْرِ تُقَامُ فَيَذْهَبُ الذَّاهِبُ إِلَى الْبَقِيعِ فَيَقْضِي حَاجَتَهُ ثُمَّ يَتَوَضَّأُ ثُمَّ يَأْتِي وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي الرَّكْعَةِ الأُولَى مِمَّا يُطَوِّلُهَا ‏.‏
Abu Sa'id al-Khudri reported:The noon prayer would start and one would go to al-Baqi' and after having relieved himself he would perform ablution and then come, while the Messenger of Allah (ﷺ) would be in the first rak'ah, because he would prolong it so much

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।