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सहीह मुस्लिम

नंबर 1014

नंबर 1014किताब 4, नंबर 176अरबी नंबरिंग 452.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ جَمِيعًا عَنْ هُشَيْمٍ، - قَالَ يَحْيَى أَخْبَرَنَا هُشَيْمٌ، - عَنْ مَنْصُورٍ، عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ مُسْلِمٍ، عَنْ أَبِي الصِّدِّيقِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ كُنَّا نَحْزِرُ قِيَامَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فِي الظُّهْرِ وَالْعَصْرِ فَحَزَرْنَا قِيَامَهُ فِي الرَّكْعَتَيْنِ الأُولَيَيْنِ مِنَ الظُّهْرِ قَدْرَ قِرَاءَةِ الم تَنْزِيلُ السَّجْدَةِ وَحَزَرْنَا قِيَامَهُ فِي الأُخْرَيَيْنِ قَدْرَ النِّصْفِ مِنْ ذَلِكَ وَحَزَرْنَا قِيَامَهُ فِي الرَّكْعَتَيْنِ الأُولَيَيْنِ مِنَ الْعَصْرِ عَلَى قَدْرِ قِيَامِهِ فِي الأُخْرَيَيْنِ مِنَ الظُّهْرِ وَفِي الأُخْرَيَيْنِ مِنَ الْعَصْرِ عَلَى النِّصْفِ مِنْ ذَلِكَ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرْ أَبُو بَكْرٍ فِي رِوَايَتِهِ الم تَنْزِيلُ وَقَالَ قَدْرَ ثَلاَثِينَ آيَةً ‏.‏
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि हम लोग ज़ुहर और अस्र में अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के क़याम (खड़े होने) का अनुमान लगाते थे। हमने अनुमान लगाया कि आप ज़ुहर की पहली दो रकातों में {الم تنزيل السجدة} (अलिफ लाम मीम तंज़ील अस-सजदा) के बराबर खड़े होते थे, तथा हमने अंदाज़ा लगाया कि उसकी बाद की दो रकातों में उसके आधा खड़े होते थे। और हमने अंदाज़ा लगाया कि आप अस्र की पहली दो रकातों में ज़ुहर की अंतिम दो रकातों के समान खड़े होत थे और बाद की दो रकातों में उसकी पहली दो रकातों के आधा खड़ा होते थे। अबू बक्र ने अपनी रिवायत में {الم تنزيل} (अलिफ लाम तंज़ील) का उल्लेख नहीं किया है, बल्कि कहा है : तीस (30) आयतों के बराबर।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।