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सहीह मुस्लिम

नंबर 1011

नंबर 1011किताब 4, नंबर 173अरबी नंबरिंग 450.05
حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ مُحَمَّدٍ الْجَرْمِيُّ، وَعُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، عَنْ مِسْعَرٍ، عَنْ مَعْنٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي قَالَ، سَأَلْتُ مَسْرُوقًا مَنْ آذَنَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم بِالْجِنِّ لَيْلَةَ اسْتَمَعُوا الْقُرْآنَ فَقَالَ حَدَّثَنِي أَبُوكَ - يَعْنِي ابْنَ مَسْعُودٍ - أَنَّهُ آذَنَتْهُ بِهِمْ شَجَرَةٌ ‏.‏
Ma'n reported.. I heard it from my father who said:I asked Masruq who informed the Messenger of Allah (ﷺ) about the night when they heard the Qur'an. He said: Your father, Ibn Mas'ud, narrated it to me that a tree informed him about that

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।