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सहीह मुस्लिम

नंबर 1008

नंबर 1008किताब 4, नंबर 170अरबी नंबरिंग 450.02
وَحَدَّثَنِيهِ عَلِيُّ بْنُ حُجْرٍ السَّعْدِيُّ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ دَاوُدَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ إِلَى قَوْلِهِ وَآثَارَ نِيرَانِهِمْ ‏.‏ قَالَ الشَّعْبِيُّ وَسَأَلُوهُ الزَّادَ وَكَانُوا مِنْ جِنِّ الْجَزِيرَةِ ‏.‏ إِلَى آخِرِ الْحَدِيثِ مِنْ قَوْلِ الشَّعْبِيِّ مُفَصَّلاً مِنْ حَدِيثِ عَبْدِ اللَّهِ ‏.‏
This hadith has been reported by Dawud with the same chain of transmitters up to the word (s):" The traces of their embers." Sha'bi said: They (the Jinn) asked about their provision, and they were the Jinn of al-jazira, up to the end of the hadith, and the words of Sha'bi have been directly transmitted from the hadith of Abdullah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।