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सहीह मुस्लिम

नंबर 1002

नंबर 1002किताब 4, नंबर 164अरबी नंबरिंग 447.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ زَكَرِيَّاءَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، فِي قَوْلِهِ عَزَّ وَجَلَّ ‏{‏ وَلاَ تَجْهَرْ بِصَلاَتِكَ وَلاَ تُخَافِتْ بِهَا‏}‏ قَالَتْ أُنْزِلَ هَذَا فِي الدُّعَاءِ ‏.‏
A'isha reported that so far as these words of (Allah) Glorious and High are concerned:" And utter not thy prayer loudly, not be low in it" (xvii. 110) relate to supplication (du'a)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।