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सहीह मुस्लिम

नंबर 1000

नंबर 1000किताब 4, नंबर 162अरबी नंबरिंग 445.02
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَهَّابِ يَعْنِي الثَّقَفِيَّ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا عَمْرٌو النَّاقِدُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الأَحْمَرُ، ح قَالَ وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَخْبَرَنَا عِيسَى بْنُ يُونُسَ، كُلُّهُمْ عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ مِثْلَهُ ‏.‏
This hadith has been narrated by Yahya b. Sa'id with the same chain of transmitters

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 4 · The Book of Prayers

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।