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सहीह मुस्लिम

नंबर 5841

नंबर 5841किताब 39, नंबर 192अरबी नंबरिंग 2236.03
وَحَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنِ ابْنِ عَجْلاَنَ، حَدَّثَنِي صَيْفِيٌّ، عَنْ أَبِي السَّائِبِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ سَمِعْتُهُ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ بِالْمَدِينَةِ نَفَرًا مِنَ الْجِنِّ قَدْ أَسْلَمُوا فَمَنْ رَأَى شَيْئًا مِنْ هَذِهِ الْعَوَامِرِ فَلْيُؤْذِنْهُ ثَلاَثًا فَإِنْ بَدَا لَهُ بَعْدُ فَلْيَقْتُلْهُ فَإِنَّهُ شَيْطَانٌ ‏"‏ ‏.‏
Abu Sa'id Khudri reported Allah's Messenger having said:There is a group of jinns in Medina who accepted Islam, so he who would see anything from these occupants should warn him three times; and if he appears after that, he should kill him for he is a satan

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।