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सहीह मुस्लिम

नंबर 5820

नंबर 5820किताब 39, नंबर 172अरबी नंबरिंग 2229.02
وَحَدَّثَنَا زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ بْنُ مُسْلِمٍ، حَدَّثَنَا أَبُو عَمْرٍو الأَوْزَاعِيُّ، ح وَحَدَّثَنَا أَبُو الطَّاهِرِ، وَحَرْمَلَةُ، قَالاَ أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، أَخْبَرَنِي يُونُسُ، ح وَحَدَّثَنِي سَلَمَةُ بْنُ، شَبِيبٍ حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ أَعْيَنَ، حَدَّثَنَا مَعْقِلٌ، - يَعْنِي ابْنَ عُبَيْدِ اللَّهِ - كُلُّهُمْ عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ غَيْرَ أَنَّ يُونُسَ، قَالَ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَخْبَرَنِي رِجَالٌ مِنْ أَصْحَابِ رَسُولِ اللَّهِ مِنَ الأَنْصَارِ وَفِي حَدِيثِ الأَوْزَاعِيِّ ‏"‏ وَلَكِنْ يَقْرِفُونَ فِيهِ وَيَزِيدُونَ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ يُونُسَ ‏"‏ وَلَكِنَّهُمْ يَرْقَوْنَ فِيهِ وَيَزِيدُونَ ‏"‏ ‏.‏ وَزَادَ فِي حَدِيثِ يُونُسَ وَقَالَ اللَّهُ ‏"‏ حَتَّى إِذَا فُزِّعَ عَنْ قُلُوبِهِمْ قَالُوا مَاذَا قَالَ رَبُّكُمْ قَالُوا الْحَقَّ ‏"‏ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِ مَعْقِلٍ كَمَا قَالَ الأَوْزَاعِيُّ ‏"‏ وَلَكِنَّهُمْ يَقْرِفُونَ فِيهِ وَيَزِيدُونَ ‏"‏ ‏.‏
The hadith has been narrated on the authority of Zuhri through the same chain of transmitters but with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।