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सहीह मुस्लिम

नंबर 5782

नंबर 5782किताब 39, नंबर 134अरबी नंबरिंग 2218.11
وَحَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، كِلاَهُمَا عَنْ جَرِيرٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ حَبِيبٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي وَقَّاصٍ، قَالَ كَانَ أُسَامَةُ بْنُ زَيْدٍ وَسَعْدٌ جَالِسَيْنِ يَتَحَدَّثَانِ فَقَالاَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِنَحْوِ حَدِيثِهِمْ ‏.‏
Ibrahim b. Sa'd b. Abu Waqqas reported:Usama b. Zaid and Sa'd had been sitting and they had been conversing and they said this hadith

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।