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सहीह मुस्लिम

नंबर 5774

नंबर 5774किताब 39, नंबर 126अरबी नंबरिंग 2218.03
وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، عَنْ عَامِرِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أُسَامَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ هَذَا الطَّاعُونَ رِجْزٌ سُلِّطَ عَلَى مَنْ كَانَ قَبْلَكُمْ أَوْ عَلَى بَنِي إِسْرَائِيلَ فَإِذَا كَانَ بِأَرْضٍ فَلاَ تَخْرُجُوا مِنْهَا فِرَارًا مِنْهُ وَإِذَا كَانَ بِأَرْضٍ فَلاَ تَدْخُلُوهَا ‏"‏ ‏.‏
Usama reported Allah's Messenger (ﷺ) as saying:Plague is a calamity which was inflicted on those who were before you, or upon Bani Isra'il. So when it has broken out in a land, don't run out of it, and when it has spread in a land, then don't enter it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।