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सहीह मुस्लिम

नंबर 5712

नंबर 5712किताब 39, नंबर 66अरबी नंबरिंग 2191.06
وَحَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَأَبُو كُرَيْبٍ - وَاللَّفْظُ لأَبِي كُرَيْبٍ - قَالاَ حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَرْقِي بِهَذِهِ الرُّقْيَةِ ‏ "‏ أَذْهِبِ الْبَاسَ رَبَّ النَّاسِ بِيَدِكَ الشِّفَاءُ لاَ كَاشِفَ لَهُ إِلاَّ أَنْتَ ‏"‏ ‏.‏
A'isha reported:Allah's Messenger (ﷺ) used to recite (this supplication) as the words of incantation:" Lord of the people, remove the trouble for in Thine Hand is the cure; none is there to relieve him (the burden of disease) but only Thou

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।