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सहीह मुस्लिम

नंबर 5700

नंबर 5700किताब 39, नंबर 54अरबी नंबरिंग 2186
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ هِلاَلٍ الصَّوَّافُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ صُهَيْبٍ، عَنْ أَبِي نَضْرَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، أَنَّ جِبْرِيلَ، أَتَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا مُحَمَّدُ اشْتَكَيْتَ فَقَالَ ‏ "‏ نَعَمْ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ بِاسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ مِنْ كُلِّ شَىْءٍ يُؤْذِيكَ مِنْ شَرِّ كُلِّ نَفْسٍ أَوْ عَيْنِ حَاسِدٍ اللَّهُ يَشْفِيكَ بِاسْمِ اللَّهِ أَرْقِيكَ ‏.‏
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि जिबरील (अलैहिस्सलाम) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और बोलेः ऐ मुहम्मद, क्या आपको तकलीफ़ है? आपने कहाः हाँ, तो उन्होंने यह दुआ पढ़ीः “अल्लाह का नाम लेकर मैं आपका इलाज करता हूँ, प्रत्येक उस चीज़ से जो आपको कष्ट दे, प्रत्येक प्राणी की बुराई अथवा ईर्ष्या करने वाली आँख से। अल्लाह आपको शिफ़ा दे। अल्लाह का नाम लेकर मैं आका इलाज करता हूँ।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।