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सहीह मुस्लिम

नंबर 5666

नंबर 5666किताब 39, नंबर 21अरबी नंबरिंग 2169.01
حَدَّثَنَا أَبُو كَامِلٍ الْجَحْدَرِيُّ، وَقُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، كِلاَهُمَا عَنْ عَبْدِ الْوَاحِدِ، - وَاللَّفْظُ لِقُتَيْبَةَ - حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ زِيَادٍ، حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سُوَيْدٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ يَزِيدَ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ مَسْعُودٍ، يَقُولُ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذْنُكَ عَلَىَّ أَنْ يُرْفَعَ الْحِجَابُ وَأَنْ تَسْتَمِعَ سِوَادِي حَتَّى أَنْهَاكَ ‏"‏ ‏.‏
Ibn Mas'ud reported:The Messenger of Allah (ﷺ) said to me: The sign that you have been permitted to come in is that the curtain is raised or that you hear me speaking quietly until I forbid you

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।