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सहीह मुस्लिम

नंबर 5657

नंबर 5657किताब 39, नंबर 12अरबी नंबरिंग 2165.02
حَدَّثَنَاهُ حَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْحُلْوَانِيُّ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، جَمِيعًا عَنْ يَعْقُوبَ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، بْنِ سَعْدٍ حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ صَالِحٍ، ح وَحَدَّثَنَا عَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، كِلاَهُمَا عَنِ الزُّهْرِيِّ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِهِمَا جَمِيعًا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ قَدْ قُلْتُ عَلَيْكُمْ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَذْكُرُوا الْوَاوَ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Zuhri that Allah's Messenger (ﷺ) said:I said 'Alaikum, and the transmitter did not make mention of the word "and

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 39 · The Book of Greetings

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।