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सहीह मुस्लिम

नंबर 5636

नंबर 5636किताब 38, नंबर 52अरबी नंबरिंग 2155.03
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا النَّضْرُ بْنُ شُمَيْلٍ، وَأَبُو عَامِرٍ الْعَقَدِيُّ ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنِي وَهْبُ بْنُ جَرِيرٍ، ح وَحَدَّثَنِي عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ بِشْرٍ، حَدَّثَنَا بَهْزٌ، كُلُّهُمْ عَنْ شُعْبَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَفِي حَدِيثِهِمْ كَأَنَّهُ كَرِهَ ذَلِكَ ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Shu'ba with a slight variation of wording and that is:The Prophet (ﷺ) uttered these words: It is I. it is I." in the manner as if he disapproved of this

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 38 · The Book of Manners and Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।