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सहीह मुस्लिम

नंबर 5625

नंबर 5625किताब 38, नंबर 40अरबी नंबरिंग 2152.02
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَابْنُ، نُمَيْرٍ قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، ح وَحَدَّثَنَا سُرَيْجُ بْنُ، يُونُسَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، ح وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، ح وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ، رَافِعٍ حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، كُلُّهُمْ عَنْ إِسْمَاعِيلَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَلَيْسَ فِي حَدِيثِ أَحَدٍ مِنْهُمْ قَوْلُ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم لِلْمُغِيرَةِ ‏ "‏ أَىْ بُنَىَّ ‏"‏ ‏.‏ إِلاَّ فِي حَدِيثِ يَزِيدَ وَحْدَهُ ‏.‏
This hadith has been reported on the authority of Ismail, with the same chain of transmitters but with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 38 · The Book of Manners and Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।