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सहीह मुस्लिम

नंबर 5602

नंबर 5602किताब 38, नंबर 17अरबी नंबरिंग 2137.02
وَحَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، أَخْبَرَنِي جَرِيرٌ، ح وَحَدَّثَنِي أُمَيَّةُ بْنُ بِسْطَامٍ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، حَدَّثَنَا رَوْحٌ، - وَهْوَ ابْنُ الْقَاسِمِ - ح وَحَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَابْنُ، بَشَّارٍ قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، كُلُّهُمْ عَنْ مَنْصُورٍ، بِإِسْنَادِ زُهَيْرٍ ‏.‏ فَأَمَّا حَدِيثُ جَرِيرٍ وَرَوْحٍ فَكَمِثْلِ حَدِيثِ زُهَيْرٍ بِقِصَّتِهِ ‏.‏ وَأَمَّا حَدِيثُ شُعْبَةَ فَلَيْسَ فِيهِ إِلاَّ ذِكْرُ تَسْمِيَةِ الْغُلاَمِ وَلَمْ يَذْكُرِ الْكَلاَمَ الأَرْبَعَ ‏.‏
This hadith has been reported on the authority of Shu'ba and there is no mention but of the fact about giving the name to the servant and there is no mention of the four expressions (of remembrance) and he did not mention the four words

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 38 · The Book of Manners and Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।