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सहीह मुस्लिम

नंबर 5599

नंबर 5599किताब 38, नंबर 14अरबी नंबरिंग 2136.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ قَالَ أَبُو بَكْرٍ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرُ بْنُ، سُلَيْمَانَ عَنِ الرُّكَيْنِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ سَمُرَةَ، وَقَالَ، يَحْيَى أَخْبَرَنَا الْمُعْتَمِرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، قَالَ سَمِعْتُ الرُّكَيْنَ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ، عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدَبٍ، قَالَ نَهَانَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنْ نُسَمِّيَ رَقِيقَنَا بِأَرْبَعَةِ أَسْمَاءٍ أَفْلَحَ وَرَبَاحٍ وَيَسَارٍ وَنَافِعٍ ‏.‏
Samura b. Jundub reported:Allah's Messenger (ﷺ) forbade us to give names to our servants as these four names: Aflah (Successful), Rabdh (Profit), Yasar (Wealth), and Nafi' (Beneficial)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 38 · The Book of Manners and Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।