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सहीह मुस्लिम

नंबर 5538

नंबर 5538किताब 37, नंबर 151अरबी नंबरिंग 2109.02
وَحَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَأَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ وَأَبُو كُرَيْبٍ كُلُّهُمْ عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ، ح وَحَدَّثَنَاهُ ابْنُ أَبِي عُمَرَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، كِلاَهُمَا عَنِ الأَعْمَشِ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ وَفِي رِوَايَةِ يَحْيَى وَأَبِي كُرَيْبٍ عَنْ أَبِي مُعَاوِيَةَ، ‏ "‏ إِنَّ مِنْ أَشَدِّ أَهْلِ النَّارِ يَوْمَ الْقِيَامَةِ عَذَابًا الْمُصَوِّرُونَ ‏"‏ ‏.‏ وَحَدِيثُ سُفْيَانَ كَحَدِيثِ وَكِيعٍ ‏.‏
This hadith has been reported on the authority of Abu Mu`awiya through another chain of transmitters (and the words are):"Verily, the most grievously tormented people amongst the denizens of Hell on the Day of Resurrection would be the painters of pictures." The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · The Book of Clothes and Adornment

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।