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सहीह मुस्लिम

नंबर 5460

नंबर 5460किताब 37, नंबर 75अरबी नंबरिंग 2085.08
وَحَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمَلِكِ، - يَعْنِي ابْنَ أَبِي سُلَيْمَانَ - ح وَحَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاذٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا أَبُو يُونُسَ، ح وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي خَلَفٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي بُكَيْرٍ، حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ، - يَعْنِي ابْنَ نَافِعٍ - كُلُّهُمْ عَنْ مُسْلِمِ بْنِ يَنَّاقَ، عَنِ ابْنِ، عُمَرَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ بِمِثْلِهِ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ أَبِي يُونُسَ عَنْ مُسْلِمٍ أَبِي الْحَسَنِ وَفِي رِوَايَتِهِمْ جَمِيعًا ‏ "‏ مَنْ جَرَّ إِزَارَهُ ‏"‏ ‏.‏ وَلَمْ يَقُولُوا ثَوْبَهُ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Muslim b. Yannaq through another chain of transmitters but with a slight variation of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · The Book of Clothes and Adornment

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।