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सहीह मुस्लिम

नंबर 5380

नंबर 5380किताब 36, नंबर 254अरबी नंबरिंग 2064.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَزُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ زُهَيْرٌ حَدَّثَنَا وَقَالَ الآخَرَانِ، أَخْبَرَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ مَا عَابَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم طَعَامًا قَطُّ كَانَ إِذَا اشْتَهَى شَيْئًا أَكَلَهُ وَإِنْ كَرِهَهُ تَرَكَهُ ‏.‏
Abu Huraira reported that Allah's Messenger (ﷺ) never found fault with food (served to him). If he liked anything, he ate it and if he did not like it he left it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · The Book of Drinks

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।