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सहीह मुस्लिम

नंबर 5118

नंबर 5118किताब 35, नंबर 51अरबी नंबरिंग 1977.02
وَحَدَّثَنِي حَجَّاجُ بْنُ الشَّاعِرِ، حَدَّثَنَا الضَّحَّاكُ بْنُ مَخْلَدٍ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، بْنِ مَرْثَدٍ عَنِ ابْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ كُنْتُ نَهَيْتُكُمْ ‏"‏ ‏.‏ فَذَكَرَ بِمَعْنَى حَدِيثِ أَبِي سِنَانٍ ‏.‏
Ibn Buraida, on the authority of his father, reported Allah's Messenger (ﷺ) having said this:I used to forbid you. The rest of the hadith is the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।