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सहीह मुस्लिम

नंबर 5102

नंबर 5102किताब 35, नंबर 39अरबी नंबरिंग 1970.03
وَحَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي عُمَرَ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالَ ابْنُ أَبِي عُمَرَ حَدَّثَنَا وَقَالَ عَبْدٌ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَالِمٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَى أَنْ تُؤْكَلَ لُحُومُ الأَضَاحِي بَعْدَ ثَلاَثٍ ‏.‏ قَالَ سَالِمٌ فَكَانَ ابْنُ عُمَرَ لاَ يَأْكُلُ لُحُومَ الأَضَاحِيِّ فَوْقَ ثَلاَثٍ ‏.‏ وَقَالَ ابْنُ أَبِي عُمَرَ بَعْدَ ثَلاَثٍ ‏.‏
Ibn 'Umar reported that Allah's Messenger (ﷺ) forbade that the flesh of sacrificial animals be eaten beyond three (days) Salim (son of Ibn Umar) said:Ibn 'Umar did not eat the flesh of the sacrificial animals beyond three (days). Ibn Abu 'Umar said:" Beyond three days

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।