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सहीह मुस्लिम

नंबर 5097

नंबर 5097किताब 35, नंबर 34अरबी नंबरिंग 1969.01
حَدَّثَنِي عَبْدُ الْجَبَّارِ بْنُ الْعَلاَءِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنَا الزُّهْرِيُّ، عَنْ أَبِي عُبَيْدٍ، قَالَ شَهِدْتُ الْعِيدَ مَعَ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ فَبَدَأَ بِالصَّلاَةِ قَبْلَ الْخُطْبَةِ وَقَالَ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نَهَانَا أَنْ نَأْكُلَ مِنْ لُحُومِ نُسُكِنَا بَعْدَ ثَلاَثٍ ‏.‏
Abu Ubaid reported:I was with 'Ali b. Abi Talib on the occasion of the 'Id day. He started with the 'Id prayer before delivering the sermon, and said: Allah's Messenger (ﷺ) forbade us to eat the flesh of our sacrificial animals beyond three days

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · The Book of Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।