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सहीह मुस्लिम

नंबर 5049

नंबर 5049किताब 34, नंबर 78अरबी नंबरिंग 1953.02
وَحَدَّثَنِيهِ زُهَيْرُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، ح وَحَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ حَبِيبٍ، حَدَّثَنَا خَالِدٌ، - يَعْنِي ابْنَ الْحَارِثِ - كِلاَهُمَا عَنْ شُعْبَةَ، بِهَذَا الإِسْنَادِ وَفِي حَدِيثِ يَحْيَى بِوَرِكِهَا أَوْ فَخِذَيْهَا ‏.‏
This hadith has been transmitted on the authority of Yahya with a slight change of wording

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of Hunting, Slaughter, and what may be Eaten

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।