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सहीह मुस्लिम

नंबर 5046

नंबर 5046किताब 34, नंबर 75अरबी नंबरिंग 1952.02
وَحَدَّثَنَاهُ أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَإِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَابْنُ أَبِي عُمَرَ، جَمِيعًا عَنِ ابْنِ عُيَيْنَةَ، عَنْ أَبِي يَعْفُورٍ، بِهَذَا الإِسْنَادِ ‏.‏ قَالَ أَبُو بَكْرٍ فِي رِوَايَتِهِ سَبْعَ غَزَوَاتٍ وَقَالَ إِسْحَاقُ سِتَّ وَقَالَ ابْنُ أَبِي عُمَرَ سِتَّ أَوْ سَبْعَ ‏.‏
This hadith has been narrated on the authority of Abu Ya'fur with the same chain of transmitters. Abu Bakr (one of the narrators) said" seven expeditions," whereas Ishaq said" six," and Ibn Umar said" six" or" seven

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of Hunting, Slaughter, and what may be Eaten

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।