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सहीह मुस्लिम

नंबर 5041

नंबर 5041किताब 34, नंबर 70अरबी नंबरिंग 1949
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، وَعَبْدُ بْنُ حُمَيْدٍ، قَالاَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، عَنِ ابْنِ، جُرَيْجٍ أَخْبَرَنِي أَبُو الزُّبَيْرِ، أَنَّهُ سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ أُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِضَبٍّ فَأَبَى أَنْ يَأْكُلَ مِنْهُ وَقَالَ ‏ "‏ لاَ أَدْرِي لَعَلَّهُ مِنَ الْقُرُونِ الَّتِي مُسِخَتْ ‏"‏ ‏.‏
Abu Zubair reported that he heard Jabir b. 'Abdullah saying that there was presented to Allah's Messenger (the flesh) of the lizard, but he refused to eat that, saying:I do not know; perhaps it (lizard) might (be one of those natives of) the distant past whose (forms) had beer, distorted

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of Hunting, Slaughter, and what may be Eaten

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।