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सहीह मुस्लिम

नंबर 5027

नंबर 5027किताब 34, नंबर 56अरबी नंबरिंग 1943.01
حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ يَحْيَى، وَيَحْيَى بْنُ أَيُّوبَ، وَقُتَيْبَةُ، وَابْنُ، حُجْرٍ عَنْ إِسْمَاعِيلَ، قَالَ يَحْيَى بْنُ يَحْيَى أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ جَعْفَرٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ دِينَارٍ، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عُمَرَ، يَقُولُ سُئِلَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم عَنِ الضَّبِّ فَقَالَ ‏ "‏ لَسْتُ بِآكِلِهِ وَلاَ مُحَرِّمِهِ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Umar reported:Allah's Messenger (ﷺ) was asked about the eating of (the flesh) of the lizard, whereupon he said: I am neither the eater of it nor its prohibitor

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of Hunting, Slaughter, and what may be Eaten

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।