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सहीह मुस्लिम

नंबर 5003

नंबर 5003किताब 34, नंबर 32अरबी नंबरिंग 1935.06
وَحَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، - يَعْنِي ابْنَ كَثِيرٍ - قَالَ سَمِعْتُ وَهْبَ بْنَ كَيْسَانَ، يَقُولُ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ بَعَثَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم سَرِيَّةً أَنَا فِيهِمْ إِلَى سِيفِ الْبَحْرِ ‏.‏ وَسَاقُوا جَمِيعًا بَقِيَّةَ الْحَدِيثِ كَنَحْوِ حَدِيثِ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ وَأَبِي الزُّبَيْرِ غَيْرَ أَنَّ فِي حَدِيثِ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ فَأَكَلَ مِنْهَا الْجَيْشُ ثَمَانِيَ عَشْرَةَ لَيْلَةً ‏.‏
Jabir b. Abdullah reported that Allah's Messenger (ﷺ) sent an expedition to the sea coast and I was one among them. The rest of the hadith is the same with a slight variation of wording that in the hadith transmitted on the authority of Wahb b. Kaisan (the words are):" The army ate out of that (the whale) for eighteen days

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · The Book of Hunting, Slaughter, and what may be Eaten

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।