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सहीह मुस्लिम

नंबर 4985

नंबर 4985किताब 34, नंबर 14अरबी नंबरिंग 1931.01
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مِهْرَانَ الرَّازِيُّ، حَدَّثَنَا أَبُو عَبْدِ اللَّهِ، حَمَّادُ بْنُ خَالِدٍ الْخَيَّاطُ عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ صَالِحٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي ثَعْلَبَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا رَمَيْتَ بِسَهْمِكَ فَغَابَ عَنْكَ فَأَدْرَكْتَهُ فَكُلْهُ مَا لَمْ يُنْتِنْ ‏"‏ ‏.‏
अबू सालबा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमाया : “जब तुम किसी शिकार पर तीर चलाओ तथा वह तुम्हारी नज़रों से ओझल हो जाए और फिर उसे बाद में पाओ, तो उसे खाओ, जब तक उसमें बदबू न आ जाए।”

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 34 · The Book of Hunting, Slaughter, and what may be Eaten

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।